मेरा गाँव हिंदी निबंध | ESSAY ON MY VILLAGE IN HINDI

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लेख में शामिल बातें

  • गाँव का परिचय
  • गाँव के लोग
  • आधुनिक प्रगति
  • पाठशाला आदि
  • गाँव की प्रगति
  • उपसंहार

मेरा गाँव हिंदी निबंध | ESSAY ON MY VILLAGE IN HINDI

मेरा गाँव भी भारत के लाखों गाँवों जैसा ही है लगभग चार सौ घरों की इस छोटी-सी बस्ती का नाम ‘कनकपुर’ है। गांव के उत्तर में कलकल करती हुई सरस्वती नदी बहती है। चारों ओर खेतों की हरियाली गाँव की शोभा बढ़ाती है। पर्वतमाला और विविध वनस्पतियां इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चाँद लगा देती हैं।

गाँव के बीच में एक बड़ा कुआँ है। वह ‘राम का कुओं’ के नाम से प्रसिद्ध है। कुएँ के सामने प्राचीन शिवालय है। पाठशाला और अस्पताल गाँव के बाहर हैं।

गाँव में सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के रहते हैं। मेरे गाँव के लोग बहुत उद्यमी और संतोषी हैं। गाँव के

लोगों की सभी जरूरतों की पूर्ति गाँव के लोग ही विविध गृहोद्योगों द्वारा करते हैं । गाँव में अधिकतर किसान हैं अनेक देवी-देवताओं में उनका अटूट विश्वास है। होली के रंग सबके हृदय में हर्ष और उल्लास भरते हैं, दीपावली की रोशनी से सबके दिल जगमगा उठते हैं।

गाँव के बच्चे उत्साह से पाठशाला में पढ़ने जाते हैं। गाँव में प्रौढ़ शिक्षा का भी प्रबंध है। गाँव के पुस्तकालय में कई पत्र-पत्रिकाएँ मंगाई जाती हैं। गाँव के बाजार में घरेलू उपयोग की लगभग सभी चीजें मिलती हैं।

मेरे गाँव के हर व्यक्ति के घर में बिजली आ गई है। प्रत्येक घर में शौचालय की व्यवस्था है। अब कुएँ के पानी ही जगह हैंडपंप का पानी उपयोग में लाया जाता है। खेती करने के ढंग में बदलाव आया है। ट्रेक्टर से खेती होती है। हर काम मशीन

से होता है। गांव में एक दवाखाना भी है। आजकल एक बैंक की शाखा भी मेरे गाँव में खुल गई है। पर गाँव के पढ़े-लिखे कुछ युवक शहरों की राह पकड़ते जा रहे हैं। मेरे गाँव में कुछ पढ़े-लिखे युवकों ने गाँव में उत्पन्न होने वाली चीजों से नमकीन तथा अचार आदि बनाने का कार्य भी

शुरू किया है। इस तरह धीरे-धीरे गाँव में कुटीर उद्योग की भी शुरुआत हो रही है। मेरे गाँव में कभी-कभी छोटी-मोटी बातों को लेकर लोगों में कहा सुनी भी हो जाती है, पर पंचायत में प्रत्येक समस्या सुलझा दी जाती है।

फिर भी मेरा गाँव अच्छा है। यहाँ प्रकृति की शोभा है, स्नेहभरे लोग हैं, धर्म की भावना है और मनुष्यता का प्रकाश है। भोले-भाले स्त्री-पुरुष, स्नेहभरे भाभी-देवरों और सरल बच्चों से हरा-भरा मेरा गाँव मुझे बहुत प्यारा लगता है।

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