मेरा प्रिय खेल हिंदी निबंध | ESSAY ON SPORT IN HINDI

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लेख में शामिल बातें

  • प्रिय खेल का परिचय
  • शौक कैसे हुआ?
  • खेल की साधना
  • महत्त्व
  • प्रिय होने का कारण ।

मेरा प्रिय खेल हिंदी निबंध | ESSAY ON SPORT IN HINDI

बचपन से ही मैं खेल-कूद का शौकीन हूँ। हॉकी, बैडमिंटन, क्रिकेट, कबड्डी आदि सभी खेलों में मेरी रुचि है, किंतु इन खेलों में क्रिकेट का खेल मुझे अधिक प्रिय है। आज सारा विश्व क्रिकेट को ‘खेलों का राजा’ मानता है।

क्रिकेट ने लोगों के दिलों को जीत लिया है। क्रिकेट मैच का नाम सुनते ही लोग उसे देखने के लिए अधीर हो उठते हैं। अखबारों के पन्ने क्रिकेट

के समाचारों से भरे होते हैं। क्रिकेट का शौक मुझे अपने बड़े भाई साहब से मिला है। उन्होंने हमारे मुहल्ले के कुछ मित्रों की एक टीम बनाई थी। यह टीम छुट्टियों के दिन मैदान में क्रिकेट खेलने जाती थी मैं भी उन सबके साथ खेलता था एक दिन मेरे बल्ले ने दनादन तीन चौके फटकार दिए। बस, उसी दिन से क्रिकेट मेरा प्रिय खेल बन गया। भाई साहब ने मुझे इस खेल के सभी दँव-पेच सिखा दिए।

मैं हररोज शाम को अपने मित्रों के साथ क्रिकेट खेलता हूँ। क्रिकेट के मैच में अवश्य देखता हूँ। मैं अपने फुरसत के समय क्रिकेट-संबंधी पत्रिकाएँ पढ़ता हूँ। अखबारों में प्रकाशित क्रिकेट-संबंधी लेखों एवं चित्रों का मेंने अच्छा-खासा संग्रह तैयार किया है। मेरे अलबम में क्रिकेट के सभी प्रसिद्ध खिलाड़ियों के चित्र हैं । प्रकृ आदि करने

पिछले साल में अपने स्कूल के क्रिकेट- दल का कप्तान था। सालभर में जितने मैच खेले गए थे, उन सबमें हमारे दल की जीत हुई थी। आज मैं अपने स्कूल के विद्यार्थियों का प्रिय खिलाड़ी हूँ।

क्रिकेट के खेल से अच्छा व्यायाम हो जाता है। इससे शरीर फुर्तीला रहता है। अनुशासन, कर्तव्य-परायणता और सहयोग की शिक्षा भी हमें क्रिकेट से मिलती है। क्रिकेट का खिलाड़ी न तो विजय मिलने पर गर्व करता है और न हारने पर निराश होता उठती ऐसा है। इस खेल द्वारा नाम और दाम दोनों पाने की भरपूर गुंजाइश रहती है।

आज मुझमें जो शारीरिक शक्ति और मानसिक क्षमता है, उसमें क्रिकेट का काफी योगदान है। मैं इस खेल का बहुत ऋणी हैं। क्रिकेट को अपना सर्वाधिक प्रिय खेल बनाकर में यह ऋण अदा करना चाहता हूँ।

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